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चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा नशों के दुष्परिणामों खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम

राज्यपाल ने दिलाई नशा मुक्ति की शपथ, कहा – नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अब पूरे समाज को मिलकर लड़नी होगी।

डॉ. अखिलेश शर्मा ने दी जानकारी—नशे की गिरफ्त में कैसे फंसते हैं बच्चे, क्या होते हैं परिणाम”

चंडीगढ़, 7 जुलाई
नशीले पदार्थों और मादक द्रव्यों के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों पर आधारित “Drugs and Substance Abuse” विषय पर एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन आज टैगोर थियेटर, सेक्टर 18, चंडीगढ़ में किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CCPCR) द्वारा किया गया था, जिसमें पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि “Drugs and Substance Abuse” जैसे विषय पर जागरूकता फैलाना आज की सबसे बड़ी सामाजिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल सूचना साझा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि एक ऐसे भविष्य की नींव है जहाँ हर बच्चा और नागरिक नशे से मुक्त, सुरक्षित और सशक्त जीवन जी सके।श्री कटारिया ने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “अभिभावकों के पास आज बच्चों के लिए समय नहीं है। यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि बच्चे किन लोगों के साथ रह रहे हैं, क्या देख रहे हैं, किस माहौल में बढ़ रहे हैं।” उन्होंने स्कूलों और अभिभावकों से बच्चों में हो रहे छोटे-छोटे व्यवहारिक परिवर्तनों को गंभीरता से देखने और संवाद बनाए रखने का आग्रह किया।

प्रशासक ने यह भी कहा कि जो युवा नशे की गिरफ्त से बाहर निकल चुके हैं, उन्हें समाज को अपनाना चाहिए और सम्मान के साथ पुनः मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। “उनके आत्म-सम्मान को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है ताकि वे फिर से जीवन में आगे बढ़ सकें। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने सभी उपस्थितों को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ प्रशासन की नहीं, पूरे समाज की है। जब तक परिवार, विद्यालय, संस्थाएं और नागरिक मिलकर एकजुट प्रयास नहीं करेंगे, तब तक इस खतरे को जड़ से खत्म करना संभव नहीं होगा।

इस अवसर पर ‘सुरक्षित बचपन, उज्ज्वल भविष्य – नशामुक्त समाज की ओर’ नामक जन-जागरूकता पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तिका विशेष रूप से बच्चों को केंद्र में रखते हुए नशे के प्रकार, दुष्परिणाम, व्यवहार में बदलाव, साइकोट्रोपिक पदार्थों के प्रभाव, उपचार की विधियाँ और सामाजिक भागीदारी जैसे विषयों पर जानकारी प्रदान करती है। पुस्तिका में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 सहित विभिन्न कानूनी पहलुओं को भी समाहित किया गया है।

कार्यक्रम में पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अखिलेश शर्मा ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि किस प्रकार शैशव और किशोरावस्था में बच्चों का सामना अप्रत्यक्ष रूप से नशीले तत्वों से हो जाता है, और यह धीरे-धीरे एक लत का रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज की भूमिका इस खतरे को पहचानने और रोकने में बेहद अहम है।

कार्यक्रम में चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री पुष्पेन्द्र कुमार भी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CCPCR) की अध्यक्ष श्रीमती शिप्रा बंसल, डॉ. अखिलेश शर्मा, अतिरिक्त प्रोफेसर, पीजीआईएमईआर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सा विशेषज्ञ और अभिभावक शामिल हुए।

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