मोहाली, 14 दिसंबर:
रयात बाहरा यूनिवर्सिटी ने “कम्प्यूटेशनल-एडेड ड्रग डिज़ाइन एवं डिस्कवरी” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला-सह-हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण का आयोजन किया। यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ साइंसेज़ द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें 10 विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से आए विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पेशेवरों सहित सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक कम्प्यूटेशनल टूल्स का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था, जो ड्रग खोज के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।
तीन दिनों तक रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. पवन के नेतृत्व में तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जबकि डॉ. सुमेश खुराना ने कार्यशाला के दौरान आवश्यक सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ रयात बाहरा विश्वविद्यालय के प्रो वाइस-चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) सतीश कुमार के उद्घाटन भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने फार्मास्यूटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में कंप्यूटर-आधारित ड्रग डिज़ाइन के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने दवाओं के विकास को तेज करने के लिए जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान और कम्प्यूटेशनल विज्ञान के एकीकरण सहित अंतर-अनुशासनात्मक अनुसंधान की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
तकनीकी सत्रों की शुरुआत पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार की ड्रग डिज़ाइन विधियों के परिचय से हुई। प्रतिभागियों ने अणु निरूपण, अणु वर्णनकर्ता, दवा समानता, वर्चुअल स्क्रीनिंग तथा कम्प्यूटेशनल-एडेड ड्रग डिज़ाइन एवं डिस्कवरी के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
यह कार्यशाला यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ साइंसेज़ के डीन डॉ. मनोज बाली के मार्गदर्शन में आयोजित की गई और रयात बाहरा ग्रुप के वाइस-चांसलर डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में आयोजित विदाई सत्र एवं प्रमाणपत्र वितरण के साथ संपन्न हुई, जिसमें उन्होंने प्रेरक एवं संवादात्मक संबोधन दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में फैकल्टी सदस्यों डॉ. हरीश कुमार, डॉ. अनिल, विशाल शर्मा, निशा और सीमा का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जबकि डॉ. श्वेता भारद्वाज ने तीनों दिनों तक कार्यक्रम का समन्वय किया।



